Lakecity Solar EnergyLAKECITYSOLAR ENERGY · BHOPAL
सोलर ईपीसी · भोपाल, मध्य प्रदेशEPC · O&M · ROOFTOP · GROUND-MOUNT

अपनी छत। अपनी ऊर्जा।

मध्य प्रदेश में आवासीय व व्यावसायिक सोलर इंस्टॉलेशन — पीएम सूर्य घर सब्सिडी, 25 वर्ष पैनल वारंटी व आजीवन रखरखाव के साथ।

  • ऑन-ग्रिड, ऑफ-ग्रिड व हाइब्रिड
  • पीएम सूर्य घर अधिकृत विक्रेता
  • आजीवन रखरखाव सेवा

आपकी छत की कमाई

आपकी आखिरी unit सबसे महंगी है। सोलर सबसे पहले वही हटाता है।

MP का घरेलू tariff telescopic है — जितनी ज्यादा बिजली, उतनी महंगी हर अगली unit। रूफटॉप सोलर पहले आपकी सबसे महंगी units हटाता है, सस्ती वाली सबसे बाद। इसीलिए बचत औसत rate से निकाले गए हिसाब से ज्यादा होती है। अपने पिछले बिल की units डालिए और खुद देखिए।

2.5 kW
पूरा बिल ढकने लायक साइज़
कनेक्शन कहाँ है

आपके बिजली बिल पर “units consumed” के नाम से छपी होती है। अभी बिल सामने नहीं है? ऊपर दिए आंकड़ों में से नज़दीकी चुन लीजिए — पूरा calculator बाद में सही कर देगा।

सिस्टम साइज़

2.5 kW

PM Surya Ghar subsidy

₹69,000

हर महीने की बचत

₹2,837

सोलर कौन सी units हटाता है

सोलर से हटींअब भी ग्रिड से
  • 301+ · 7.24− ₹362
  • 151–300 · 7.05− ₹1,058
  • 51–150 · 5.67− ₹567
  • 1–50 · 4.71− ₹212

सोलर जिन units की जगह लेता है, उन पर आप ₹6.37 प्रति unit बचाते हैं। आपका सबसे ऊपरी slab ₹7.24 पर चलता है — सोलर सबसे पहले वही rate हटाता है, और फिर सीढ़ी नीचे की तरफ छीलता जाता है।

आज का बिल
₹2,942
सोलर के बाद बिल
₹105

हर महीने बनने वाली units
345
25 साल में कुल बचत
₹8,23,032

सोलर के बाद बिल कभी शून्य नहीं होता — जब तक कनेक्शन है, fixed charge लगता रहेगा, और ऊपर का आंकड़ा उसे जोड़कर बना है। 25 साल का हिसाब आज के MPERC tariff पर टिका है और हर साल 0.5% panel degradation मानकर चलता है। Tariff हर साल बढ़ा है; बढ़ता रहा तो असली बचत इससे ज्यादा ही होगी।

सब्सिडी समझाई गई

₹78,000 न छोड़ें।

पूरी योजना पढ़िए

PM Surya Ghar आपके पहले दो किलोवाट पर ₹30,000 प्रति kW और तीसरे पर ₹18,000 देती है। उसके बाद कुछ नहीं — 6 kW सिस्टम को उतनी ही रकम मिलती है जितनी 3 kW को। 3 kW से बड़ा सिस्टम अक्सर सही फैसला होता है, पर वह subsidy का फैसला कभी नहीं होता।

  • ₹30,000
  • ₹60,000
  • ₹78,000
  • ₹78,000
  • 1 kW
  • 2 kW
  • 3 kW
  • 6 kW

₹78,000 एक घर के लिए तय सीमा है, और 6 kW उस तक 3 kW से जल्दी नहीं पहुँचता। Subsidy पैनलों की rated capacity पर बनती है, inverter पर नहीं — battery, tracker या छोटा wind hybrid जोड़ने से इसमें एक रुपया नहीं बढ़ता।

Subsidy आपके बैंक खाते तक कैसे पहुँचती है

  1. 01

    National Portal पर registration

    pmsuryaghar.gov.in पर अपने बिजली consumer number के साथ registration कीजिए। Portal एक application ID और एक e-token देता है — subsidy आखिर में इसी के बदले मिलती है।

  2. 02

    Vendor चुनिए और कीमत तय कीजिए

    इस योजना में DISCOM की कोई tendering नहीं होती; रेट आपस में तय होते हैं। Design, सामान और व्यावसायिक शर्तें आपके और portal से चुने गए vendor के बीच तय होती हैं।

  3. 03

    Installation, फिर portal पर अपलोड

    सिस्टम लगता है, safety checks और handover briefing के साथ। फिर सिस्टम की जानकारी और सारे ज़रूरी दस्तावेज़ — geo-tagged फोटो समेत — portal पर चढ़ते हैं और फाइल आपके DISCOM के पास चली जाती है।

  4. 04

    DISCOM की जाँच और मीटर

    DISCOM मौके पर आकर प्लांट देखता है, metering agreement पर दस्तखत करता है और net meter लगाता है। इस भौतिक जाँच से पहले subsidy की प्रक्रिया शुरू नहीं होती।

  5. 05

    E-token भुनाइए

    आपकी असल installed capacity पर बनने वाली रकम के साथ e-token चालू होता है। उसे redeem कीजिए और पैसा portal पर दर्ज बैंक खाते में आता है — guidelines में DISCOM की मंज़ूरी से 15 दिन तय हैं। सिस्टम loan पर लिया है तो रकम पहले loan खाते में जाती है।

एग्रीमेंट से कमीशनिंग तक

प्रोजेक्ट असल में कैसे चलता है।

आमतौर पर 4–14 हफ़्ते

छह चरण, इसी क्रम में, उन हिस्सों के साथ जिनका ज़िक्र कोई नहीं करता — metering agreement, DCR serial numbers, inspector की checklist। इनमें से दो की रफ़्तार हमारे नहीं, आपके DISCOM के हाथ में है, और वे नीचे चिह्नित हैं।

  1. 012–9 दिन

    सेटअप

    नोटरी एग्रीमेंट, subsidy वाले मामलों में PM Surya Ghar portal पर registration, portal पर vendor selection की पुष्टि, और scope व capacity लिखित में तय।

  2. 023–10 दिन

    सामान की खरीद

    सर्वे से bill of materials अंतिम रूप लेता है, स्टॉक जाँचा जाता है, पैनल, inverter और mounting structure रवाना होते हैं, और साइट पर मिलने की पुष्टि के बाद ही टीम भेजी जाती है।

  3. 032–5 दिन

    इंस्टॉलेशन

    Mounting structure, पैनल, wiring और inverter, earthing, फिर quality checklist। रोज़ की प्रगति रिपोर्ट और फोटो, ताकि छत पर चढ़े बिना आपको सब दिखता रहे।

  4. 041–4 हफ़्ते

    मीटर और ग्रिड

    आपके DISCOM के पास net metering की अर्ज़ी — या जहाँ RDSS लागू है वहाँ smart meter activation — फिर insulation, earth continuity और I-V curve टेस्टिंग, और commissioning test run।

    DISCOM की रफ़्तार

  5. 052–6 हफ़्ते

    कमीशनिंग

    DISCOM या राज्य प्राधिकरण प्लांट का निरीक्षण करके commissioning certificate जारी करता है, और पैनल व inverter के serial numbers DCR प्रमाण के तौर पर portal पर चढ़ते हैं।

    DISCOM की रफ़्तार

  6. 06लगातार

    हैंडओवर और सर्विस

    Warranty registration, पूरे दस्तावेज़ आपके हाथ में, और service schedule अपने आप बन जाता है। यहीं प्रोजेक्ट खत्म होता है और रखरखाव का रिश्ता शुरू।

Subsidy अपने अलग ट्रैक पर चलती है। Central Financial Assistance आमतौर पर कमीशनिंग के 2–8 हफ़्ते बाद आती है और ऊपर के किसी चरण को नहीं रोकती — सिस्टम चालू होते ही बिजली बनाना शुरू कर देता है, पैसा आया हो या नहीं।

हर प्रकार का सोलर, शुरू से अंत तक।

सभी सेवाएँ देखें

3 kW रूफटॉप से 500 kW औद्योगिक संयंत्र तक — सर्वे, इंस्टॉलेशन, सब्सिडी व आजीवन रखरखाव तक एक ही टीम।

हम कहाँ इंस्टॉल करते हैं

आपकी फाइल तीन में से किसी एक कंपनी के पास जाएगी।

सभी स्थान देखें

मध्य प्रदेश के 55 ज़िलों में बिजली तीन वितरण कंपनियाँ बाँटती हैं, और आप किसके अंदर आते हैं यह आपके राजस्व संभाग से तय होता है — भोपाल से दूरी से नहीं। इसी से तय होता है कि net metering की अर्ज़ी किस portal पर जाएगी और मीटर की जाँच कौन सा दफ़्तर करेगा। फाइल हम दोनों हाल में लगाते और चलाते हैं।

MPWZ

15 ज़िले

मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड

मुख्यालय: इंदौर

राजस्व संभाग

इंदौर · उज्जैन

ज़िलेवार गाइड

MPCZ

16 ज़िले

मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड

मुख्यालय: भोपाल

राजस्व संभाग

भोपाल · नर्मदापुरम · ग्वालियर · चंबल

ज़िलेवार गाइड

MPEZ

24 ज़िले

मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड

मुख्यालय: जबलपुर

राजस्व संभाग

जबलपुर · रीवा · सागर · शहडोल

ज़िलेवार गाइड

सागर भोपाल से जबलपुर की तुलना में ज़्यादा पास है, फिर भी उसका काम जबलपुर से चलता है — सीमा राजस्व संभाग के हिसाब से बनती है, नक्शे के नहीं। अपने ही कनेक्शन के बारे में आवेदक सबसे ज़्यादा यही गलती करते हैं, और उससे हफ़्तों का नुकसान होता है।

क्षेत्राधिकार का स्रोत: MPCZ (MP Madhya Kshetra Vidyut Vitaran Co. Ltd.) — Company Profile, Jurisdiction — "areas covered by the Commissioners of Bhopal, Hoshangabad, Gwalior, and Chambal" — https://portal.mpcz.in/web/about-us/company-profile

शुरुआत सर्वे से कीजिए।

इस पेज के आंकड़े बिल से बने अनुमान हैं। असल आंकड़ा तब बनता है जब कोई आपकी छत पर खड़ा होकर shade analysis करे और आपका sanctioned load देखे। वह विज़िट मुफ़्त है और उससे कोई बाध्यता नहीं बनती।

  • PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana — registered vendor
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